
कार्तिक माहात्म्य अध्याय 23 मूल संस्कृत में, अर्थ हिन्दी में
कार्तिक माहात्म्य अध्याय 23 – इस कथा में भगवान विष्णु के द्वारपाल जय और विजय की उत्पत्ति और उनके चरित्र का वर्णन है। ये दोनों ब्रह्मन ऋषि कर्दम के पुत्र थे, जो भगवान विष्णु की अनंत भक्ति में लीन रहते थे। यज्ञ में भाग लेने के दौरान धन के वितरण में उनके बीच विवाद हुआ, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने एक-दूसरे को शाप दिया। भगवान विष्णु ने उनके दिए गए शापों को भोगने के बाद उन्हें उद्धार कर वैकुण्ठधाम पहुँचाया।