मार्गकृष्ण उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा - utpanna ekadashi vrat katha in hindi

उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा – utpanna ekadashi vrat katha

मार्गकृष्ण उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा – utpanna ekadashi vrat katha in hindi : हेमन्त ऋतु के मार्गशीर्ष माह में कृष्णपक्ष की एकादशी का व्रत करना चाहिए। दशमी की शाम दातुन करें और रात को भोजन न करें। एकादशी को सुबह संकल्पपूर्वक कार्य करें और स्नान करें। स्नान के बाद चंदन का तिलक लगाएं। भगवान का पूजन करें और रात को दीपदान करें। रात्रि में जागरण करते हुए श्री हरि का नाम जप करें।

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कार्तिक माहात्म्य - चर्तुथोध्यायः, कार्तिक माहात्म्य अध्याय 4

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 4

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 4 : देवताओं का दुःख सुनकर भगवान विष्णु ने उन्हें शंखचूड़ वध करने का आश्वासन/वर दिया और मत्स्यावतार ग्रहण करके कश्यप ऋषि के अंजलि वाले जल में प्रकट हुये और बढ़ने लगे, महर्षि कश्यप ने उन्हें क्रमशः कमंडल,कूप, तालाब, समुद्र में रखा। फिर भगवान ने शंखचूड़ का वध करके वेद लिया।

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सिद्धिविनायक व्रत कथा - Siddhivinayak Vrat Katha

सिद्धिविनायक व्रत कथा – Siddhivinayak Vrat Katha

सिद्धिविनायक व्रत कथा में भरद्वाज मुनि सूत से पूछते हैं कि विघ्नों का निवारण कैसे होगा। भगवान श्रीकृष्ण द्वारा दिया गया उत्तर में सिद्धिविनायक की पूजा व्रत करने को कहा गया, जिससे नष्टराज्य की पुनर्प्राप्ति हो सकती है। सिद्धिविनायक की पूजा से सभी कार्यों की सफलता होती है और चाहे विद्या हो या धन, विजय या सौभाग्य, सब इच्छाएं पूर्ण होती हैं।

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कार्तिक माहात्म्य - पंचविंशोऽध्यायः, कार्तिक माहात्म्य अध्याय 25

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 25 मूल संस्कृत में, अर्थ हिन्दी में

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 25 – सतयुग में देश, त्रेता में ग्राम तथा द्वापर में कुलों को दिया पुण्य या पाप मिलता था, लेकिन कलियुग में कर्त्ता को ही भोगना पड़ता है। संसर्ग से पाप व पुण्य दूसरे को मिलते हैं। मैथुन में एकत्र होना और एक साथ भोजन करने से पाप-पुण्य का फल मिलता है। जो पंक्ति में बैठे हुए भोजन करने वालों की पत्तल लांघता है, वह अपने पुण्य का भाग देता है। बिना ऋण उतारे मृत्यु को प्राप्त होने पर ऋण देने वाले पुण्य के भागी होते हैं। इस प्रकार दूसरों के लिए पुण्य या पाप बिना दिए भी मिल सकते हैं, किन्तु यह नियम कलियुग में लागू नहीं होते। कलियुग में तो कर्त्ता को ही अपने पाप व पुण्य भोगने पड़ते हैं।

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कार्तिक माहात्म्य - पंचदशोऽध्यायः, कार्तिक माहात्म्य अध्याय 15

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 15 मूल संस्कृत में, अर्थ हिन्दी में

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 15 मूल संस्कृत में – वीरभद्र को भूमि पर गिरा देख शिवगणों में हाहाकार मच गया और वो वहां चले गये जहां भगवान शंकर थे। तब स्वयं भगवान शंकर युद्ध करने आये एवं जलंधर के साथ उनका युद्ध होने लगा, जब जलंधर को प्रतीत हुआ कि भगवान शिव अजेय हैं तो उसने माया का प्रयोग किया और सभी अचेत से हो गये

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देवशयनी एकादशी व्रत कथा - Devshayani ekadashi vrat katha

देवशयनी एकादशी व्रत कथा – Devshayani ekadashi vrat katha

देवशयनी एकादशी व्रत कथा – Devshayani ekadashi vrat katha : आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का नाम देवशयनी एकादशी है। इसका एक अन्य नाम पद्मा एकादशी भी है। इसमें राजा मान्धाता की कथा है जिसमें एक बार उनके राज्य में वर्षा बंद होने से अकाल हो गया और प्रजासहित अंगिरा मुनि के उपदेश से देवशयनी एकादशी का व्रत किया जिससे वर्षा हुई और अकाल का निवारण हो गया।

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चैत्र कृष्ण पापमोचनी एकादशी व्रत कथा - Papmochini ekadashi vrat katha

पापमोचनी एकादशी व्रत कथा – Papmochani ekadashi vrat katha

पापमोचनी एकादशी व्रत कथा – Papmochani ekadashi vrat katha : कथा के अनुसार कुबेर के चैत्ररथ वन में च्यवन मुनि का आश्रम था जहाँ उनके पुत्र मेधावी मुनि भी तपस्या करते थे। उस वन में विहार करने के लिए इंद्र भी आया करते थे। एक बार उनके साथ आयी अप्सरा मंजुघोषा मेधावी मुनि पर मोहित हो गयी और उन्हें आकर्षित करने का प्रयास करने लगी जिसमें कामदेव ने भी शंकर भगवान से वैर को याद करके उसका साथ दिया।

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पापांकुशा एकादशी व्रत कथा - Papankusha ekadashi vrat katha

पापांकुशा एकादशी व्रत कथा – Papankusha ekadashi vrat katha

पापांकुशा एकादशी व्रत कथा – Papankusha ekadashi vrat katha : आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का नाम पापांकुशा एकादशी है। पापों के लिये यह एकादशी अंकुश के सामान है इसीलिये इसका नाम पापांकुशा एकादशी है। मनुष्य जब तक पापांकुशा एकादशी नहीं करता है तब तक उसके शरीर का पाप नष्ट नहीं होता। इस एकादशी के प्रभाव से मनोकामना की पूर्ति होती है एवं स्वर्ग/मोक्ष के द्वार भी खुल जाते हैं।

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महालक्ष्मी व्रत कथा

महालक्ष्मी व्रत कथा – Mahalaxmi Vrat Katha

महालक्ष्मी व्रत कथा – Mahalaxmi Vrat Katha : पूजा करने के बाद प्रतिदिन कथा भी श्रवण करनी चाहिये। कथा श्रवण के विषय में जो महत्वपूर्ण तथ्य है वो यह है कि हिन्दी आदि अन्य स्थानीय भाषाओं में भाव समझने के लिये तो सुना जा सकता है किन्तु फलदायकता हेतु संस्कृत में ही श्रवण करनी चाहिये।

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