कार्तिक माहात्म्य - नवमोध्यायः, कार्तिक माहात्म्य अध्याय 9

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 9 मूल संस्कृत में

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 9 – जब इन्द्र और बृहस्पति भगवान शंकर के दर्शन के लिए गए, तो शंकर जी ने उनकी परीक्षा लेने हेतु जटाधारी रूप धारण किया। इन्द्र के अहंकार के कारण भगवान शिव से वाद-विवाद हुआ, भगवान शिव के नेत्रों से जो क्रोध निकला, उसे समुद्र में फेंक दिया, जिसके परिणामस्वरूप रुदन करता एक बालक उत्पन्न हुआ जिसे जलंधर कहा गया।

Read More
कामिका एकादशी व्रत कथा - kamika ekadashi vrat katha in hindi

कामिका एकादशी व्रत कथा – kamika ekadashi vrat katha in hindi

कामिका एकादशी व्रत कथा – kamika ekadashi vrat katha in hindi : श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम कामिका एकादशी है। इस एकादशी की कथा में विशेषतः एकादशी व्रत का माहात्म्य वर्णित है जिसको सुनने मात्र से भी वाजपेय यज्ञ का पुण्य प्राप्त होता है। ब्रह्महत्या – गर्भहत्या जैसे जघन्य पाप भी इस एकादशी के प्रभाव से नष्ट हो जाते हैं। इस एकादशी की कथा में भगवान विष्णु को तुलसी अतिप्रिय है यह भी बताया गया है।

Read More
कार्तिक माहात्म्य - द्वाविंशोऽध्यायः, कार्तिक माहात्म्य अध्याय 22

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 22 मूल संस्कृत में, अर्थ हिन्दी में

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 22 – एक दिन विष्णुदास ने नित्यकर्म करने के बाद भोजन बनाया, किन्तु कोई उसे चुरा ले गया। उन्होंने दुबारा भोजन नहीं बनाया क्योंकि पूजा का समय छूट जाता। अगले दिन भी भगवान विष्णु को भोग अर्पण करने जाते समय भोजन फिर चुराया गया। इस क्रम में सात दिन बीत गये। विष्णुदास सोचने लगे – कौन ऐसा कर रहा है? उन्होंने रसोई की रक्षा करने का निश्चय किया।

Read More
आमलकी एकादशी व्रत कथा - Amalaki ekadashi vrat katha

आमलकी एकादशी व्रत कथा – Amalaki ekadashi vrat katha

आमलकी एकादशी व्रत कथा – Amalaki ekadashi vrat katha : एक व्याधे ने भगवान की पूजा, कथा होते देखा-सुना, आहाररहित रहते हुये रात्रिजागरण भी कर लिया जिसके फलस्वरूप अगले जन्म में वह भी राजा बना और एक बार जब म्लेच्छों से घिर गया था तब एकादशी देवी ने प्रकट होकर म्लेच्छों का नाश किया।

Read More
अजा एकादशी व्रत कथा - aja ekadashi katha in hindi

अजा एकादशी व्रत कथा – aja ekadashi katha in hindi

अजा एकादशी व्रत कथा – aja ekadashi katha in hindi : भाद्रपद के कृष्णपक्ष की एकादशी का नाम अजा एकादशी है। युधिष्ठिर के पूछने पर भगवान श्रीकृष्ण ने कथा में बताया कि यह एकादशी सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र से संबंधित है। जब सत्यवादी हरिश्चंद्र के ऊपर दुखों का पहाड़ टूटा था तो उन्हें अपनी पत्नी और स्वयं तक को भी बेचना पड़ा था। सौभाग्य से गौतम मुनि का समागम हुआ और उन्होंने अजा एकादशी व्रत का उपदेश दिया जिसके प्रभाव से सत्यवादी हरिश्चंद्र के समस्त दुःख समाप्त हो गये।

Read More
जयंती एकादशी व्रत कथा - Jayanti ekadashi vrat katha in hindi

जयंती एकादशी व्रत कथा – Jayanti ekadashi vrat katha in hindi

जयंती एकादशी व्रत कथा – Jayanti ekadashi vrat katha in hindi : कथा के अनुसार राजा बलि से वामन भगवान ने इसी दिन तीन पग भूमि में सब-कुछ लेकर उसे पाताल लोक भेजकर सदा उसके पास रहने का वचन दिया था। भगवान विष्णु एक रूप से क्षीरसागर में और दूसरे रूप से पाताल में राजा बलि के यहां भी निवास करते हैं।

Read More
कार्तिक माहात्म्य - चतुर्दशोऽध्यायः, कार्तिक माहात्म्य अध्याय 14

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 14 मूल संस्कृत में, अर्थ हिन्दी में

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 14 मूल संस्कृत में, अर्थ हिन्दी में – कार्तिक माहात्म्य के चौदहवें अध्याय में नंदीश्वर, गणेश और कार्तिकेय इन तीनों के साथ कालनेमि, शुम्भ और निशुंभ के युद्ध का वर्णन है। जब दैत्यसेना पीड़ित होने लगी तब स्वयं जलंधर युद्ध करने आ गया। जलंधर ने वीरभद्र के मस्तक पर परिघ से प्रहार किया जिससे वह छिन्नमस्तक होकर रुधिर वमन करता हुआ भूमि पर गिर गया।

Read More
कार्तिक माहात्म्य - त्रयोविंशोऽध्यायः, कार्तिक माहात्म्य अध्याय 23

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 23 मूल संस्कृत में, अर्थ हिन्दी में

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 23 – इस कथा में भगवान विष्णु के द्वारपाल जय और विजय की उत्पत्ति और उनके चरित्र का वर्णन है। ये दोनों ब्रह्मन ऋषि कर्दम के पुत्र थे, जो भगवान विष्णु की अनंत भक्ति में लीन रहते थे। यज्ञ में भाग लेने के दौरान धन के वितरण में उनके बीच विवाद हुआ, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने एक-दूसरे को शाप दिया। भगवान विष्णु ने उनके दिए गए शापों को भोगने के बाद उन्हें उद्धार कर वैकुण्ठधाम पहुँचाया।

Read More
कार्तिक माहात्म्य त्रयोदशोऽध्यायः - कार्तिक माहात्म्य अध्याय 13 मूल संस्कृत में, हिन्दी अर्थ सहित

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 13 मूल संस्कृत में, अर्थ हिन्दी में

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 13 – इस कथा का एक अन्य आशय भी है वो यह है कि यदि आप धर्म का पालन करते भी हैं किन्तु देवताओं को अप्रसन्न कर रखा है तो वो असंतुष्ट देवता आपके विनाश का कारण बनते हैं। जलंधर धर्मपूर्वक प्रजा का पालन करता था, रावण-कंस आदि की भांति न तो दुराचारी था न ही आततायी। फिर भी नारद जी ने देवताओं का हित साधने हेतु उस कर्म के लिये प्रेरित किया जो उसके विनाश का कारण बना।

Read More
पौषशुक्ल पुत्रदा एकादशी कथा - Putrada Ekadashi

पुत्रदा एकादशी व्रत कथा – Putrada ekadashi vrat katha

पुत्रदा एकादशी व्रत कथा – Putrada ekadashi vrat katha : पुत्रदा एकादशी की कथा में राजा सुकेतुमान पुत्रहीनता से दुखी था, लेकिन इस एकादशी के व्रत के प्रभाव से उसे पुत्र की प्राप्ति हुई। मुनियों की कृपा से राजा ने यह व्रत किया और सफलतापूर्वक एक तेजस्वी पुत्र पाया। यह व्रत न केवल इस लोक में पुत्र देता है, बल्कि मृत्यु के उपरांत स्वर्ग में भी स्थान दिलाता है।

Read More