श्री सत्यनारायण कथा, श्री सत्यनारायण व्रत कथा संस्कृत में - संपूर्ण कथा सातों अध्याय

श्री सत्यनारायण व्रत कथा संस्कृत में – संपूर्ण कथा सातों अध्याय (7Chapter)

श्री सत्यनारायण व्रत कथा संस्कृत में : सत्यनारायण व्रत कथा संस्कृत में अवश्य सुनें।
कथा सुनने का पुण्य संस्कृत (देववाणी) में सुनने से ही मिलता है।
हिन्दी या अन्य भाषाओं में समझने के लिये कर सकते हैं।
कथा का पुण्य पाने के लिये ब्राह्मण के द्वारा ही सुने।
कथा सुनते समय कथावाचक से नीचे आसन रखें।
हाथों में फूल रखकर कथा सुने और कथा के बाद भगवान को चढ़ा दें।
कथा के समय आपस में बातचीत न करें।
यदि संस्कृत समझ में न भी आये तो भी ध्यान से संस्कृत पाठ को अवश्य सुनें।

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योगिनी एकादशी व्रत कथा - Yogini ekadashi vrat katha

योगिनी एकादशी व्रत कथा – Yogini ekadashi vrat katha

योगिनी एकादशी व्रत कथा – Yogini ekadashi vrat katha : योगिनी एकादशी की कथा में हेममाली नामक यक्ष की कथा है जो कुबेर का माली था। एक दिन कुबेर भगवान शिव की पूजा कर रहा था किन्तु यह पुष्प लेकर उपास्थित न हुआ जिसके कारण कुबेर ने इसे कुष्ठ और पत्नी वियोग का श्राप दे दिया। कालक्रम से योगिनी एकादशी व्रत के प्रभाव से हेममाली शापमुक्त होता है।

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मार्गकृष्ण उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा - utpanna ekadashi vrat katha in hindi

उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा – utpanna ekadashi vrat katha

मार्गकृष्ण उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा – utpanna ekadashi vrat katha in hindi : हेमन्त ऋतु के मार्गशीर्ष माह में कृष्णपक्ष की एकादशी का व्रत करना चाहिए। दशमी की शाम दातुन करें और रात को भोजन न करें। एकादशी को सुबह संकल्पपूर्वक कार्य करें और स्नान करें। स्नान के बाद चंदन का तिलक लगाएं। भगवान का पूजन करें और रात को दीपदान करें। रात्रि में जागरण करते हुए श्री हरि का नाम जप करें।

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कार्तिक माहात्म्य - तृतीयोध्यायः, कार्तिक माहात्म्य अध्याय 3

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 3 : Kartik Mahatmya

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 3 : Kartik Mahatmya – कार्तिक मास में व्रत करने वालों को सब प्रकार से धन, पुत्र-पुत्री आदि देते रहना और उनकी सभी आपत्तियों से रक्षा करना। हे धनपति कुबेर! मेरी आज्ञा के अनुसार तुम उनके धन-धान्य की वृद्धि करना क्योंकि इस प्रकार का आचरण करने वाला मनुष्य मेरा रूप धारण कर के जीवनमुक्त हो जाता है।

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देवशयनी एकादशी व्रत कथा - Devshayani ekadashi vrat katha

देवशयनी एकादशी व्रत कथा – Devshayani ekadashi vrat katha

देवशयनी एकादशी व्रत कथा – Devshayani ekadashi vrat katha : आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का नाम देवशयनी एकादशी है। इसका एक अन्य नाम पद्मा एकादशी भी है। इसमें राजा मान्धाता की कथा है जिसमें एक बार उनके राज्य में वर्षा बंद होने से अकाल हो गया और प्रजासहित अंगिरा मुनि के उपदेश से देवशयनी एकादशी का व्रत किया जिससे वर्षा हुई और अकाल का निवारण हो गया।

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कार्तिक माहात्म्य - एकविंशोऽध्यायः, कार्तिक माहात्म्य अध्याय 21

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 21 मूल संस्कृत में, अर्थ हिन्दी में

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 21 मूल संस्कृत में, अर्थ हिन्दी में – विष्णु पार्षदों के वचन सुनकर धर्मदत्त ने कहा – सभी मनुष्य भक्तों का कष्ट दूर करने वाले श्रीविष्णु की विधिपूर्वक आराधना करते हैं। इनमें कौन-सा साधन भगवान विष्णु को प्रसन्न करने वाला है, यह जानने के लिए पार्षदों ने पूर्वजन्म की कथा सुनाने लगे। उन्होंने बताया कि कांचीपुरी में चोल नामक एक राजा हुए थे, जिनके शासन में कोई दरिद्र या दुःखी नहीं था।

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अजा एकादशी व्रत कथा - aja ekadashi katha in hindi

अजा एकादशी व्रत कथा – aja ekadashi katha in hindi

अजा एकादशी व्रत कथा – aja ekadashi katha in hindi : भाद्रपद के कृष्णपक्ष की एकादशी का नाम अजा एकादशी है। युधिष्ठिर के पूछने पर भगवान श्रीकृष्ण ने कथा में बताया कि यह एकादशी सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र से संबंधित है। जब सत्यवादी हरिश्चंद्र के ऊपर दुखों का पहाड़ टूटा था तो उन्हें अपनी पत्नी और स्वयं तक को भी बेचना पड़ा था। सौभाग्य से गौतम मुनि का समागम हुआ और उन्होंने अजा एकादशी व्रत का उपदेश दिया जिसके प्रभाव से सत्यवादी हरिश्चंद्र के समस्त दुःख समाप्त हो गये।

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पद्मिनी एकादशी व्रत कथा - Padmini ekadashi vrat katha

पद्मिनी एकादशी व्रत कथा – Padmini ekadashi vrat katha

पद्मिनी एकादशी व्रत कथा – Padmini ekadashi vrat katha : अधिकमास में प्रथम पक्ष शुक्ल होता है और द्वितीय पक्ष कृष्ण होता है। अधिकमास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का नाम पद्मिनी एकादशी है। पद्मिनी एकादशी की व्रत कथा में मुख्य रूप से एकादशी व्रत का माहात्म्य तो बताया ही गया है साथ ही एकादशी व्रत की विधि भी बताई गयी है। इस कथा में कार्तवीर्य अर्जुन (सहस्रार्जुन) के जन्म की भी कथा है।

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कार्तिक माहात्म्य अध्याय 10 मूल संस्कृत में, हिन्दी अर्थ सहित

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 10 मूल संस्कृत में, हिन्दी अर्थ सहित

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 10 – वृंदा से विवाहित जलंधर सुखपूर्वक जीवन व्यतीत कर रहा था, एक बार संयोग से उसे राहु का कटा सिर दिखा जिसके बारे में उसने दैत्यगुरु शुक्राचार्य से प्रश्न किया तो शुक्राचार्य ने समुद्रमंथन से अमृत-रत्नादि निकलने से लेकर अमृतपान करने वाले राहु का भगवान विष्णु द्वारा सिर कटने की पूरी कथा बताई, जिसे सुनकर जलंधर अत्यंत क्रुद्ध हुआ और दैत्यों की सेना जुटाकर देवताओं से युद्ध करने लगा।

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पापांकुशा एकादशी व्रत कथा - Papankusha ekadashi vrat katha

पापांकुशा एकादशी व्रत कथा – Papankusha ekadashi vrat katha

पापांकुशा एकादशी व्रत कथा – Papankusha ekadashi vrat katha : आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का नाम पापांकुशा एकादशी है। पापों के लिये यह एकादशी अंकुश के सामान है इसीलिये इसका नाम पापांकुशा एकादशी है। मनुष्य जब तक पापांकुशा एकादशी नहीं करता है तब तक उसके शरीर का पाप नष्ट नहीं होता। इस एकादशी के प्रभाव से मनोकामना की पूर्ति होती है एवं स्वर्ग/मोक्ष के द्वार भी खुल जाते हैं।

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