कार्तिक माहात्म्य - एकोनत्रिंशोऽध्यायः, कार्तिक माहात्म्य अध्याय 29

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 29 मूल संस्कृत में, अर्थ हिन्दी में

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 29 – क्या आप जानते हैं कि पीपल के पेड़ की पूजा केवल शनिवार को क्यों होती है? ऋषियों के सवाल पर सूतजी ने एक रोचक कथा सुनाई। सूतजी ऋषियों को बताते हैं कि पीपल की पूजा का मूल कारण अलक्ष्मी और लक्ष्मी के बीच का संबंध है। लक्ष्मी जी और उनकी कुरूप बहन अलक्ष्मी के इस विवाह संबंधी जटिलता में दो बातें छिपी हैं: पारिवारिक सम्मान और अलक्ष्मी की रहन-सहन की इच्छा।

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श्री सत्यनारायण कथा, श्री सत्यनारायण व्रत कथा संस्कृत में - संपूर्ण कथा सातों अध्याय

श्री सत्यनारायण व्रत कथा संस्कृत में – संपूर्ण कथा सातों अध्याय (7Chapter)

श्री सत्यनारायण व्रत कथा संस्कृत में : सत्यनारायण व्रत कथा संस्कृत में अवश्य सुनें।
कथा सुनने का पुण्य संस्कृत (देववाणी) में सुनने से ही मिलता है।
हिन्दी या अन्य भाषाओं में समझने के लिये कर सकते हैं।
कथा का पुण्य पाने के लिये ब्राह्मण के द्वारा ही सुने।
कथा सुनते समय कथावाचक से नीचे आसन रखें।
हाथों में फूल रखकर कथा सुने और कथा के बाद भगवान को चढ़ा दें।
कथा के समय आपस में बातचीत न करें।
यदि संस्कृत समझ में न भी आये तो भी ध्यान से संस्कृत पाठ को अवश्य सुनें।

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कार्तिक माहात्म्य - षड्विंशोऽध्यायः, कार्तिक माहात्म्य अध्याय 26

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 26 मूल संस्कृत में, अर्थ हिन्दी में

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 26 – उसी समय नारदजी आए और कहा कि धनेश्वर ने पुण्यात्माओं के दर्शन-संभाषण-स्पर्श आदि संसर्ग से पुण्य प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि धनेश्वर के पाप नष्ट हो चुके हैं क्योंकि यह पुण्य कर्म करने वाले लोगों के संपर्क में रहा है। इसके बाद यमराज ने धनेश्वर को नरक दिखाने की आज्ञा दी।

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देवोत्थान एकादशी व्रत कथा - Devotthana ekadashi vrat katha

देवोत्थान एकादशी व्रत कथा – Devotthana ekadashi vrat katha

देवोत्थान एकादशी व्रत कथा – Devotthana ekadashi vrat katha : कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का नाम देवोत्थान एकादशी है, प्रबोधिनी एकादशी भी एक अन्य नाम है। इस एकादशी को भगवान विष्णु का जागरण होता है। ब्रह्मा जी ने नारद मुनि को इसकी कथा सुनाई है जिसका वर्णन स्कंदपुराण में है। इस कथा में एकादशी का माहात्म्य, तुलसी माहात्म्य, कार्तिक माह और चातुर्मास में भगवान विष्णु की पूजा माहात्म्य आदि भी बताया गया है।

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जयंती एकादशी व्रत कथा - Jayanti ekadashi vrat katha in hindi

जयंती एकादशी व्रत कथा – Jayanti ekadashi vrat katha in hindi

जयंती एकादशी व्रत कथा – Jayanti ekadashi vrat katha in hindi : कथा के अनुसार राजा बलि से वामन भगवान ने इसी दिन तीन पग भूमि में सब-कुछ लेकर उसे पाताल लोक भेजकर सदा उसके पास रहने का वचन दिया था। भगवान विष्णु एक रूप से क्षीरसागर में और दूसरे रूप से पाताल में राजा बलि के यहां भी निवास करते हैं।

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निर्जला एकादशी व्रत कथा - nirjala ekadashi vrat katha

निर्जला एकादशी व्रत कथा – Nirjala ekadashi vrat katha

निर्जला एकादशी व्रत कथा – Nirjala ekadashi vrat katha : ज्येष्ठ के शुक्लपक्ष की एकादशी का निर्जल उपवास करने से सारे पाप धुल जाते हैं और मनुष्य स्वर्ग को प्राप्त करता है, जो वर्षपर्यंत एकादशी करने में अक्षम हो वह इस एक निर्जला एकादशी व्रत करने से भी सभी एकादशी का फल प्राप्त कर लेता है। इस व्रत से सभी तीर्थों और दानों का फल मिलता है।

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फाल्गुनकृष्ण विजया एकादशी कथा - Vijaya ekadashi

विजया एकादशी व्रत कथा – Vijaya ekadashi vrat katha

विजया एकादशी व्रत कथा – Vijaya ekadashi vrat katha : कथा के अनुसार जब सीताहरण के बाद सेना के साथ लंका विजय करने के लिए भगवान श्रीराम समुद्रतट पर पहुंचे तो अथाह समुद्र को देखकर विचलित हो गये। भाई लक्ष्मण के बताने पर निकट में स्थित वकदाल्भ्य मुनि के आश्रम पर गए तो उन्होंने विजया एकादशी व्रत करने का उपदेश दिया। भगवान श्रीराम ने मुनि की बताई विधि के अनुसार विजया एकादशी का व्रत किया और व्रत के प्रभाव से लंका विजय करके पुनः सीता और लक्ष्मण सही अयोध्या नगरी में वापस आये।

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कार्तिक माहात्म्य द्वादशोऽध्यायः - कार्तिक माहात्म्य अध्याय 12 मूल संस्कृत में, हिन्दी अर्थ सहित

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 12 मूल संस्कृत में, अर्थ हिन्दी में

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 12 – जलंधर कामपीड़ित हो जाता है और पार्वती को प्राप्त करने के लिए राहु को शिव के पास भेजता है। शिव का रौद्र पुरुष राहु को रोकता है, जबकि राहु शिव की शरण लेकर रक्षा की प्रार्थना करता है। शिव उसे छोड़ने का आदेश देते हैं। रौद्र पुरुष को अंत में शिव द्वारा अपना द्वारपाल बनाया जाता है।

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मार्गकृष्ण उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा - utpanna ekadashi vrat katha in hindi

उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा – utpanna ekadashi vrat katha

मार्गकृष्ण उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा – utpanna ekadashi vrat katha in hindi : हेमन्त ऋतु के मार्गशीर्ष माह में कृष्णपक्ष की एकादशी का व्रत करना चाहिए। दशमी की शाम दातुन करें और रात को भोजन न करें। एकादशी को सुबह संकल्पपूर्वक कार्य करें और स्नान करें। स्नान के बाद चंदन का तिलक लगाएं। भगवान का पूजन करें और रात को दीपदान करें। रात्रि में जागरण करते हुए श्री हरि का नाम जप करें।

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पौषकृष्ण सफला एकादशी कथा - Safala ekadashi

सफला एकादशी व्रत कथा – Safala ekadashi vrat katha

सफला एकादशी व्रत कथा – Safala ekadashi vrat katha : पौष कृष्णपक्ष की एकादशी का नाम ‘सफला एकादशी’ है। इस दिन नारायण का पूजन करनी चाहिए और अच्छे ऋतु-फलों से भगवान का पूजन करना चाहिए; स्वच्छ नारियल, बिजौरे, जम्बीरी, अनार, सुपारी आदि से विधिपूर्वक पूजन करें। व्रत वाले दिन दीपदान करने और जागरण करने का भी विशेष महत्व है।

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