योगिनी एकादशी व्रत कथा - Yogini ekadashi vrat katha

योगिनी एकादशी व्रत कथा – Yogini ekadashi vrat katha

योगिनी एकादशी व्रत कथा – Yogini ekadashi vrat katha : योगिनी एकादशी की कथा में हेममाली नामक यक्ष की कथा है जो कुबेर का माली था। एक दिन कुबेर भगवान शिव की पूजा कर रहा था किन्तु यह पुष्प लेकर उपास्थित न हुआ जिसके कारण कुबेर ने इसे कुष्ठ और पत्नी वियोग का श्राप दे दिया। कालक्रम से योगिनी एकादशी व्रत के प्रभाव से हेममाली शापमुक्त होता है।

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हरितालिका (तीज) कथा

हरितालिका (तीज) कथा

हरितालिका (तीज) कथा : पूजा का काल प्रदोषकाल ही होता है अतः प्रदोषकाल में ही पूजा करे। पवित्रीकरणादि करके सर्वप्रथम संकल्प करे। यदि चौदह वर्षों तक ही करना हो तो प्रथम वर्ष चौदह वर्ष करने का संकल्प करे, अन्य वर्षों में संकल्प करे। यदि 14 वर्ष से अधिक भी करना हो तो 14 वर्षों वाला संकल्प प्रथम वर्ष न करे।

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कार्तिक माहात्म्य - एकोनत्रिंशोऽध्यायः, कार्तिक माहात्म्य अध्याय 29

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 29 मूल संस्कृत में, अर्थ हिन्दी में

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 29 – क्या आप जानते हैं कि पीपल के पेड़ की पूजा केवल शनिवार को क्यों होती है? ऋषियों के सवाल पर सूतजी ने एक रोचक कथा सुनाई। सूतजी ऋषियों को बताते हैं कि पीपल की पूजा का मूल कारण अलक्ष्मी और लक्ष्मी के बीच का संबंध है। लक्ष्मी जी और उनकी कुरूप बहन अलक्ष्मी के इस विवाह संबंधी जटिलता में दो बातें छिपी हैं: पारिवारिक सम्मान और अलक्ष्मी की रहन-सहन की इच्छा।

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कार्तिक माहात्म्य - पञ्चमोध्यायः

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 5

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 5 : इसमें नित्यकर्म अर्थात शौच, शुद्धि आदि के विधान का उल्लेख करते हुये विष्णु-शिव आदि की पूजा करने, भजन-कीर्तन-नृत्य आदि का विधान बताया गया है। देवताओं के लिये वर्जित पुष्पों का भी इस आलेख में वर्णन किया गया है।

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कार्तिक माहात्म्य - चतुर्विंशोऽध्यायः, कार्तिक माहात्म्य अध्याय 24

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 24 मूल संस्कृत में, अर्थ हिन्दी में

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 24 – ब्रह्मा ने यज्ञ करने का निर्णय लिया था और उस वक्त त्वरा और गायत्री के बीच विवाद हुआ। यज्ञ के समय त्वरा ने गायत्री को अपनी जगह बैठाने पर शाप दिया, कि सब देवता नदियां बन जाएंगे और गायत्री ने त्वरा को भी नदी बनने का श्राप दे दिया। इस पर देवता परेशान हुए और उनकी अनुपस्थिति के कारण यज्ञ में विघ्न आ गया। अंत में, सब देवता अपने अंशों से नदियाँ बने, जिसमें कृष्णा और वेणी शामिल हैं।

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मोहिनी एकादशी व्रत कथा - Mohini ekadashi vrat katha

मोहिनी एकादशी व्रत कथा – Mohini ekadashi vrat katha

मोहिनी एकादशी व्रत कथा – Mohini ekadashi vrat katha : श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को वैशाख शुक्लपक्ष की एकादशी का महत्व बताया, जिसे मोहिनी एकादशी कहा जाता है। मोहिनी एकादशी का व्रत ऐसा है जो हर पाप का मिटा देता है। युधिष्टिर ने श्री कृष्ण से इसकी महिमा पूछी और उन्होंने राम और वशिष्ठ की कथा सुनाई। धृष्टबुद्धि जैसे पापी भी इस व्रत के प्रभाव से अपने पापों से छुटकारा पा सकते हैं तो सामान्य मनुष्यों की बात ही क्या है।

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ऋषि पंचमी व्रत पूजा विधि और कथा

ऋषि पंचमी व्रत कथा

ऋषि पंचमी व्रत कथा : भाद्र शुक्ल पंचमी को ऋषि पंचमी कहा जाता है। इस दिन व्रत पूर्वक अरुंधतिसहित सप्तर्षियों का पूजन करना चाहिये। पूजा करने के उपरांत कथा श्रवण करे और फिर विसर्जन दक्षिणा करे। इस व्रत का माहात्म्य चकित करने वाला है क्योंकि यह व्रत प्रायश्चित्तात्मक है। स्त्रियां जो रजस्वला संबंधी स्पर्शास्पर्श नियमादि का उल्लंघन करती हैं चाहे ज्ञात रूप से हो अथवा अज्ञात रूप से ऋषि पंचमी के प्रभाव से उस दोष का शमन हो जाता है।

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पौषशुक्ल पुत्रदा एकादशी कथा - Putrada Ekadashi

पुत्रदा एकादशी व्रत कथा, श्रावण शुक्ल – Putrada ekadashi vrat katha in hindi

पुत्रदा एकादशी व्रत कथा, श्रावण शुक्ल – Putrada ekadashi vrat katha in hindi : श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का नाम पुत्रदा एकादशी है। भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर के पूछने पर महिष्मति पुरी के राजा महीजित की कथा सुनाई जो अपुत्र थे। लोमश ऋषि के उपदेश से प्रजा सहित उन्होंने पुत्रदा एकादशी का व्रत किया जिससे उनको पुत्र की प्राप्ति हुयी और इसी कारण इस एकादशी का नाम पुत्रदा एकादशी है।

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