कार्तिक माहात्म्य - सप्तदशोऽध्यायः, कार्तिक माहात्म्य अध्याय 17

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 17 मूल संस्कृत में, अर्थ हिन्दी में

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 17 मूल संस्कृत में, अर्थ हिन्दी में – जलंधर युद्धभूमि में भगवान शिव की शक्ति से प्रभावित होकर माया का उपयोग करता है और मायागौरी का निर्माण करता है। भगवान शिव पार्वती की पीड़ा देख व्याकुल हो जाते हैं, किन्तु विष्णु के समझाने पर माया का निवारण हो जाता है। शिवजी की रौद्र अवस्था से दैत्य भाग जाते हैं। अंत में, जलंधर का विनाश होता है और देवताओं की प्रसन्नता होती है।

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कार्तिक माहात्म्य अध्याय 11 मूल संस्कृत में, हिन्दी अर्थ सहित

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 11 मूल संस्कृत में, अर्थ हिन्दी में

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 11 – जलंधर भगवान विष्णु से लक्ष्मी और गणों सहित अपने निवास पर रहने का वर मांगता है, जो विष्णु स्वीकार कर लेते हैं। तत्पश्चात जलंधर त्रिभुवन पर शासन करता है, देव-दानव-यक्ष-गन्धर्व आदि सभी उसके वशवर्ती हो जाते हैं,देवताओं के सभी रत्नादि पर भी जलंधर का अधिकार हो जाता है। जलंधर प्रजा का धर्मपूर्वक पालन करता है।

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कार्तिक माहात्म्य त्रयोदशोऽध्यायः - कार्तिक माहात्म्य अध्याय 13 मूल संस्कृत में, हिन्दी अर्थ सहित

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 13 मूल संस्कृत में, अर्थ हिन्दी में

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 13 – इस कथा का एक अन्य आशय भी है वो यह है कि यदि आप धर्म का पालन करते भी हैं किन्तु देवताओं को अप्रसन्न कर रखा है तो वो असंतुष्ट देवता आपके विनाश का कारण बनते हैं। जलंधर धर्मपूर्वक प्रजा का पालन करता था, रावण-कंस आदि की भांति न तो दुराचारी था न ही आततायी। फिर भी नारद जी ने देवताओं का हित साधने हेतु उस कर्म के लिये प्रेरित किया जो उसके विनाश का कारण बना।

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आमलकी एकादशी व्रत कथा - Amalaki ekadashi vrat katha

आमलकी एकादशी व्रत कथा – Amalaki ekadashi vrat katha

आमलकी एकादशी व्रत कथा – Amalaki ekadashi vrat katha : एक व्याधे ने भगवान की पूजा, कथा होते देखा-सुना, आहाररहित रहते हुये रात्रिजागरण भी कर लिया जिसके फलस्वरूप अगले जन्म में वह भी राजा बना और एक बार जब म्लेच्छों से घिर गया था तब एकादशी देवी ने प्रकट होकर म्लेच्छों का नाश किया।

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फाल्गुनकृष्ण विजया एकादशी कथा - Vijaya ekadashi

विजया एकादशी व्रत कथा – Vijaya ekadashi vrat katha

विजया एकादशी व्रत कथा – Vijaya ekadashi vrat katha : कथा के अनुसार जब सीताहरण के बाद सेना के साथ लंका विजय करने के लिए भगवान श्रीराम समुद्रतट पर पहुंचे तो अथाह समुद्र को देखकर विचलित हो गये। भाई लक्ष्मण के बताने पर निकट में स्थित वकदाल्भ्य मुनि के आश्रम पर गए तो उन्होंने विजया एकादशी व्रत करने का उपदेश दिया। भगवान श्रीराम ने मुनि की बताई विधि के अनुसार विजया एकादशी का व्रत किया और व्रत के प्रभाव से लंका विजय करके पुनः सीता और लक्ष्मण सही अयोध्या नगरी में वापस आये।

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फाल्गुन शुक्ल आमलकी एकादशी व्रत कथा - Amalaki ekadashi vrat katha

मोक्षदा एकादशी व्रत कथा – Mokshada ekadashi vrat katha

मोक्षदा एकादशी व्रत कथा – Mokshada ekadashi vrat katha : मोक्षदा एकादशी व्रत की कथा राजा वैखानस से संबंधित है जिसमें राजा वैखानस अपने पिता के नरक में कष्ट भोगते देख कर मोक्ष के उपाय ढूंढते हैं। उन्हें मुनि का आशीर्वाद मिलता है, जो मोक्षदा एकादशी करने का सुझाव देते हैं। राजा वैखानस ने इस व्रत को विधिपूर्वक किया और भगवान विष्णु की उपासना की, जिसके बाद उन्होंने अपने पिता को स्वर्ग में स्थान प्राप्त करते देखा।

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कार्तिक माहात्म्य - अष्टमोध्यायः, कार्तिक माहात्म्य अध्याय 8

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 8 मूल संस्कृत में और हिन्दी अर्थ सहित

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 8 – कार्तिक व्रत की पूर्णता उसके उद्यापन से होती है, जो विशिष्ट विधियों द्वारा सम्पन्न होता है। कार्तिक माह के आठवें अध्याय में नारद मुनि महाराज पृथु को बताते हैं कि उद्यापन के लिए तुलसी के आसपास सुंदर मंडप बनाकर भगवान विष्णु और उनके द्वारपालों की मूर्तियों की पूजा करनी चाहिए। उपवास, गीत-संगीत और व्रत की नियमित विधियों के पालन से पापों का नाश और विष्णु लोक की प्राप्ति संभव है। उद्यापन से व्रतकर्ता को भगवान की कृपा मिलती है और सभी इच्छाएँ पूर्ण होती हैं।

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जयंती एकादशी व्रत कथा - Jayanti ekadashi vrat katha in hindi

जयंती एकादशी व्रत कथा – Jayanti ekadashi vrat katha in hindi

जयंती एकादशी व्रत कथा – Jayanti ekadashi vrat katha in hindi : कथा के अनुसार राजा बलि से वामन भगवान ने इसी दिन तीन पग भूमि में सब-कुछ लेकर उसे पाताल लोक भेजकर सदा उसके पास रहने का वचन दिया था। भगवान विष्णु एक रूप से क्षीरसागर में और दूसरे रूप से पाताल में राजा बलि के यहां भी निवास करते हैं।

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एकादशी व्रत कथा

एकादशी व्रत कथा – संक्षेप में 26 एकादशी की व्रत कथा

एकादशी व्रत कथा : सभी एकादशी के अलग-अलग नाम कहे गए हैं अरु सभी एकादशी में भगवान विष्णु की पूजा भी विभिन्न नामों से की जाती है। सभी एकादशी के फल भी अलग-अलग बताये गए हैं जो नामानुसार परिलक्षित भी होते हैं। यहाँ सभी एकादशी के कथा संक्षेप में प्रस्तुत की जा रही है। यथाशीघ्र प्रत्येक एकादशी की अलग-अलग पूर्ण कथा भी प्रस्तुत की जाएगी।

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महालक्ष्मी व्रत कथा

महालक्ष्मी व्रत कथा – Mahalaxmi Vrat Katha

महालक्ष्मी व्रत कथा – Mahalaxmi Vrat Katha : पूजा करने के बाद प्रतिदिन कथा भी श्रवण करनी चाहिये। कथा श्रवण के विषय में जो महत्वपूर्ण तथ्य है वो यह है कि हिन्दी आदि अन्य स्थानीय भाषाओं में भाव समझने के लिये तो सुना जा सकता है किन्तु फलदायकता हेतु संस्कृत में ही श्रवण करनी चाहिये।

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